Dark Matter & Dark Energy | Cosmological Dark Matter & Dark Energy की पूरी जानकारी।

अनंत फैला य ब्रह्मांड अपने अंदर अनेकों रहस्य छुपाए हुए हैं। हम इसके बारे में जितना जानने की कोशिश कर रहे हैं, उतने ही नए प्रश्न हमारे सामने खड़े होते जा रहे हैं। अब तक हमें लगता था कि ब्रह्मांड में मैटर केवल अणु, परमाणु, सितारे, आकाशगंगा, ग्रह पेड़, चट्टान और जीव-जंतुओं के रूप में ही मौजूद है। जो हमें स्पष्ट रूप से दिखाई भी देते हैं, परंतु ऐसा नहीं है। असल में जो ब्रह्मांड हमें दिखाई देता है वह वास्तविकता का केवल छोटा सा अंश है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस ब्रह्मांड का लगभग 95% भाग ऐसे मैटर से बना है जो हमें दिखाई ही नहीं देता।

खगोल शास्त्रियों की माने तो इस ब्रह्मांड का 25% भाग डार्क मैटर से बना है 69% भाग डार्क एनर्जी से तथा केवल 5% भाग नॉर्मल मैटर से।
तो आखिर यह डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है क्या, जानेंगे आज के इस एपिसोड में। तो चलिए शुरू करते हैं आज का यह एपिसोड।


1990 दशक के शुरुआती वर्षों तक हमें यह ज्ञात था कि हमारा ब्रह्मांड निरंतर फैलता जा रहा है। इसके फैलने के बारे में एक और चीज हम पक्के तौर पर कह रहे थे और वह यह था कि या तो इस ब्रह्मांड की एनर्जी डेंसिटी इतनी पर्याप्त है कि एक समय इसका फैलना बंद हो जाएगा और यह पुनः एक बिंदु में समा जाएगा या फिर इसकी एनर्जी डेंसिटी इतनी कम है कि यह हमेशा फैलता ही रहेगा। यहां आप सोच रहे होंगे कि यह एनर्जी डेंसिटी क्या है। दरअसल एनर्जी डेंसिटी एनर्जी कि वह मात्रा है जिसे हम एक पदार्थ या सिस्टम में स्टोर कर सकें। साधारण शब्दों में अगर कहूं तो अगर किसी पदार्थ की एनर्जी डेंसिटी ज्यादा है तो इसका मतलब है कि उस पदार्थ में ज्यादा एनर्जी स्टोर्ड है। मतलब कि अनुमान था कि या तो ब्राह्मण एक बिंदु में वापस समा जाएगा या फिर फैलता ही रहेगा अपनी एनर्जी डेंसिटी के अनुसार।

पर थेओरी के मुताबिक एक बात बिल्कुल तय थी की गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड के फैलने की गति को बीतते समय के साथ धीमा करता जाएगा। ऐसा वह इसलिए मानते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड सामान्य तौर पर दिखाई देने वाले पदार्थों से बना और इनका गुरुत्वाकर्षण पूरे ब्रह्मांड को बांधे हुए हैं। गुरुत्वाकर्षण में खिंचाव के कारण इसके फैलने की गति का धीमा होना स्वाभाविक थी। पर 1998 में हबल टेलीस्कोप ने एक सुपरनोवा की तस्वीर खींची, जिससे यह पता चला कि हमारे ब्रह्मांड के फैलने की गति भूतकाल में आज के मुकाबले धीमी थी। इसका मतलब था कि इसके फैलने की गति घटने की बजाय और बढ़ रही है जो कि उस समय के खगोल शास्त्रियों की थ्योरी के विपरीत था। सबको मालूम था कि कुछ तो है जिसके कारण ऐसा हो रहा है पर कोई भी उसे समझा नहीं पा रहा था। अंत में इस गुत्थी को सुलझाने के लिए उन्होंने एक एनर्जी की कल्पना की जो ब्रह्मांड के खाली स्थानों में मौजूद रहती है तथा इसे नाम दिया डार्क एनर्जी। डार्क एनर्जी काफी अजीब और रहस्यमई है। यह हमारे आसपास हर जगह मौजूद है। पर हम ना ही इसे माप सकते हैं और ना ही इसे टेस्ट कर सकते हैं। लेकिन बहुत ही स्पष्ट रूप से इसका प्रभाव देख सकते हैं। ब्रह्मांड में जहां जहां खाली स्थान है, वहां हर सेकंड नई संरचनाएं हो रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो डार्क एनर्जी कुछ इस तरह की ऊर्जा है जो खाली जगह के अंदर भूत हो सकती है। क्योंकि खाली जगहों के पास संयुक्त ब्रह्मांड में मौजूद सभी चीजों की तुलना में अधिक ऊर्जा है। डार्क एनर्जी क्या हो सकती है, इस पर कई विचार हैं। पहला विचार यह है कि डार्क एनर्जी ब्रह्मांड में मौजूद खाली स्थानों की एक प्रॉपर्टी हो सकती है। Albert Einstein ऐसे पहले शख्स थे जिन्होंने यह कहा था कि खाली स्थान केवल दिखने में खाली होते हैं, पर उनमें कुछ आश्चर्यजनक गुण होते हैं।
पहला गुण जिसके बारे में उन्होंने कहा था वह यह था कि, ब्रह्मांड में खाली स्थान खुद ब खुद बन सकते हैं तथा इसकी मात्रा ब्रह्मांड के फैलने के साथ बढ़ सकती है। उन्होंने अपनी थ्योरी ऑफ ग्रेविटी में एक कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट का जिक्र किया था तथा बताया था कि खाली स्थानों की अपनी एक एनर्जी होती है। जितना ज्यादा खाली स्थान बढ़ेगा उतनी ही यह एनर्जी भी बढ़ेगी जिससे कि यह ब्रह्मांड सदा फैलता ही रहेगा। पर उस समय वह यह नहीं समझा पाए कि आखिर इस कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट की जरूरत ही क्या थी। जिसके कारण उनकी उस थ्योरी को नकार दिया गया था। शायद यह कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट ही डार्क एनर्जी है। दूसरा विचार यह है कि यह खाली स्थान वास्तव में अस्थाई हो और आभासी कणौं से भरी हुई हो। यह कणं लगातार स्वता ही बनते रहते हो तथा वापस कहीं अदृश्य हो जाते हो।
इन कणों में स्थित ऊर्जा डार्क एनर्जी हो सकती है। पर यहां एक दिक्कत है जब भौतिकी शास्त्रियों ने यह गणना करने की कोशिश की कि ऐसी एनर्जी खाली स्थान को कितनी एनर्जी प्रदान कर सकती है तो उनका कैलकुलेशन गलत साबित हुआ क्योंकि यह वास्तव के डार्क एनर्जी से 10 पर पावर 120 गुना ज्यादा था। अतः डार्क एनर्जी हमारे लिए अभी भी एक रहस्य ही बना हुआ है। अंतिम विचार यह है कि Einstein की थ्योरी ऑफ ग्रेविटी ही गलत है तथा हमें इसे फिर से समझने की जरूरत है। हमें एक ऐसे थ्योरी की जरूरत जो ब्रह्मांड के हर गुण को समझा सके। पर ऐसी नई थेओरी क्या हो सकती है। आज तक हम आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ ग्रेविटी के कारण ही ब्रह्मांड में मौजूद खगोलीय पिंडों के व्यवहार को न सिर्फ समझते आए हैं बल्कि उन्हें सही भी पाया है। ऐसे में एक बिल्कुल नई थ्योरी की कल्पना करना भी मुश्किल है। ऐसे में डार्क एनर्जी का रहस्य फिलहाल तो सुलझता हुआ प्रतीत नहीं होता। यह तो हुई डार्क एनर्जी की बातें। आइए अब जानते हैं डार्क मैटर के बारे में।
बीते कुछ वर्षों में हमने शोध से यह पाया कि ब्रह्मांड में मौजूद प्रत्यक्ष पदार्थ का गुरुत्वाकरषण आकाशगंगाएं और अन्य जटिल संरचनाएं बनाने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं है। अगर वह मजबूत होता तो आकाशगंगाओं की जगह पूरे ब्रह्मांड में सभी जगह पर तारे बिखरे होते उनके झुंड नहीं। इसका मतलब है की कोई ऐसी सामग्री है जो ब्रह्मांड में अकाशगंगाओं का अस्तित्व बनाए रखता है। क्योंकि ऐसी कोई सामग्री हमें दिखाई नहीं देती, इसे डार्क मैटर का नाम दिया गया है। पर यह डार्क मैटर वास्तव में क्या और कैसा है। दुर्भाग्य से हमें ऐसा कोई भी सुराग अब तक नहीं मिला है जिससे हम यह जान सके कि डार्क मैटर आखिर है क्या और वह काम कैसे करता है। अब तक हम केवल यह जानते हैं कि यह निश्चित रूप से ब्रह्मांड में मौजूद है क्योंकि यह गुरुत्वाकरषण के साथ रिया प्रतिक्रिया करता है।
अल्बर्ट आइंस्टीन की थ्योरी के अनुसार विशाल और भारी खगोलीय पिंड जैसे कि ब्लैक होल, स्पेस और टाइम को वितरित करते हैं तथा प्रकाश की दिशा भी मोड़ देते हैं। ब्रह्मांड में डार्क मैटर वह खाली स्थान होते हैं जो प्रकाश की दिशा मोड़ देते हैं जिससे उनकी मौजूदगी का पता चलता है। इस प्रक्रिया को ग्रेविटेशनल लेंसिंग कहते हैं तथा यह प्राकृतिक लेंस की तरह काम करता है जिससे हम सुदूर मौजूद आकाशगंगाऔं को देख पाते हैं।

डार्क मैटर शायद एक जटिल और अनोखे कणौं से बना है, जो किसी भी तरह के पदार्थ और प्रकाश के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता। हम जानते हैं कि डार्क मैटर एंटी मैटर नहीं है क्योंकि एंटीमैटर सामान्य पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया कर गामा किरणों का उत्पादन करते हैं। हम यह भी जानते हैं कि डार्क मैटर ब्लैक होल से भी नहीं बने हैं क्योंकि यह काफी मात्रा में मौजूद है। यह सामान्य पदार्थों से बने काले बादल भी नहीं है तो आखिर यह किस चीज से बने हो सकते हैं। ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि यह Non-Baryonic पदार्थ से बने हो सकते हैं। हम अब तक जिन पदार्थों के बारे में जानते हैं जैसे कि। इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन यह सब Baryonic पदार्थ में आते हैं। इसका मतलब है की यह ऐसे पदार्थ से बने हो सकते हैं जिनके बारे में हम अभी तक नहीं जानते। ऐसे पदार्थों की खोज हमारे विज्ञान को कई गुना आगे ले जा सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार जिस पदार्थ की वह खोज कर रहे हैं उसका नाम WIMPS यानी कि Weakly Interacting Massive Particles है तथा इनका मास एक प्रोटोन के मास से 100 गुना अधिक है।
पर वह साधारण पदार्थों से प्रतिक्रिया नहीं करते जिसके कारण उन्हें डिटेक्ट करना काफी मुश्किल है। Nutralino भी एक पोटेंशियल कैंडिडेट है जो न्यूट्रॉन से भारी पर धीमे में होते हैं, लेकिन ऐसे पार्टिकल्स भी अभी तक देखे नहीं गए हैं। कुछ वैज्ञानिक तो यह भी मानते हैं कि डार्क मैटर आकाशगंगाओं का ऐसा समूह है, जो अदृश्य हैं तथा वहां फिजिक्स के सिद्धांत अलग तरह से काम करते हैं। जैसा कि मैंने पहले ही बताया डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के बारे में हम अभी तक काफी कम जानकारी इकट्ठा कर पाए हैं। मतलब कि हमारे पास अब भी कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलना अभी बाकी है। डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के बारे में हमारे पास जितने भी सिद्धांत है, वह अभी तक केवल सिद्धांत ही हैं। शायद भविष्य में हम इन गुत्थियों को सुलझा पाए।

आज के इस एपिसोड में बस इतना ही। आशा करता हूं कि यह एपिसोड आपको पसंद आया होगा। यह एपिसोड आपको कैसा लगा कमेंट के जरिए हमें जरूर बताएं। अंतरिक्ष, ब्रह्मांड और विज्ञान से जुड़े आर्टिकल हम आगे भी आपके लिए लाते रहेंगे। तो दोस्तों मिलते हैं एक और दिलचस्प एपिसोड में तब तक के नमस्ते

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