इन्हें देखने के लिए आप जिंदा नहीं बचेंगे। | भविष्य की घटनाएं जो आप जरूर देखना चहेंगे।
1.ZEITPYRAMIDE(The Time Pyramid)
तो पहली चीज जो हम मिस करने वाले हैं वह Zeitpyramid है। बेसिकली Zeitpyramide एक टाइम Pyramid है। जो कि जर्मनी के Wemding शहर में है, जो कि कोंक्रीट ब्लॉक्स का है। दरअसल इस पिरामिड को बनाने की शुरुआत हुई थी 1993 में और तकरीबन हर 10 साल में इस पिरामिड में एक कंक्रीट का पत्थर लगाया जाता है या इंस्टॉल किया जाता है और 1993 से लेकर के अब तक में केवल तीन ही ब्लॉक लगाए गए हैं।
हर 10 साल में एक पत्थर और इस रफ्तार से यह पिरामिड 3183 में कंप्लीट होगा और इस पिरामिड में आखिरी पत्थर लगाएंगे हमारे पर पर पर पर पर पर पर पर याने कि हमारे तीसवें परपोते की पीढ़ी द्वारा। लेकिन हमारे बाद की तीसरी पीढ़ी भी Chernobyl exclusive zone में नहीं रह पाएगी।2.CHERNOBYL EXCLUSIVE ZONE
यहां पर 1986 में हुई दुर्घटना के बाद भी रेडियो एक्टिव कॉन्टेमिनेशन बहुत ज्यादा है। जहां पर लोग चाहकर भी बस नहीं सकते। दरअसल Chernobyl में 1986 में एक न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक विस्फोट हुआ, जिसकी वजह से 30 किलोमीटर के एरिया में पूरी तरीके से जानलेवा रेडिएशन फैला हुआ है। वहां के जितने भी लोग थे मजबूरन उनको अपनी जागीर छोड़ कर के जानि पड़ी और तबसे वो 30 किलोमीटर का एरिया जो कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के चारों ओर फैला हुआ है, बिना इंसानों के खंडहर में तब्दील हो चुका है। उस जगह में आज भी इतना ज्यादा रेडिएशन है कि आज भी वहां पर कोई इंसान नहीं रह सकता और यहां तक कि हमारी तीसवी पीढ़ी जोकि साल 3186 में आएंगे। वह भी वहां पर नहीं बस पाएंगे क्योंकि तब भी वहां पर का रेडिएशन बहुत ज्यादा होगा। यहां तक इस साल 5000 या फिर 10000 साल तक भी कोई नहीं बस सकेगा और तकरीबन 22 हजार साल में जा करके वहां पर रेडिएशन शायद खत्म होगा और तब जाकर के वो 30 किलोमीटर का एरिया, वह स्थान सुरक्षित होगा।3.SUPERNOVA EXPLOSIONS
शायद शायद हम इंसान परजाति के जीवन काल में या फिर पक्के तौर पर आने वाले 1000000 सालों में हमारे सूरज से कई गुना बड़े सितारे जैसे Betelgeuse
4.GALACTIC COLLISION
अभी इस बात को देखो और समझो हमारी जो अकाश गंगा है, वह चारों ओर से सितारों से भरी पड़ी है और जब भी हम जमीन से आसमान की ओर देखते हैं, खासतौर पर रात में तो ऐसा लगता है कि जैसे दूध के छोटे-छोटे बूंदे पूरे आसमान में हर तरफ फैले हुए हैं। तभी तो अंग्रेजी में हम अपने आकाशगंगा को कहते हैं द मिल्कीवे गैलेक्सी। लेकिन लेकिन ज्यादातर जो आकाशंगाएं है उनका नाम दूध से मिलता जुलता रखा गया है जैसे कि मिल्की वे, लैक्टोस, लैक्टिक, ग लैक्टिक। लेकिन जब भी हम आसमान कि तरफ देखते हैं तो जितने भी सितारे हमें नजर आते हैं वो सारे के सारे हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के अंदर होते हैं, लेकिन वहीं आकाश में एक धुंधली सी तिरछे आकार की कोई चीज है और यह चीज कोई सितारा नहीं है। हमारे मिलकीवे का कोई गलैक्टिक क्लाउड नहीं है बल्कि यह एक दूसरा ही आकाशगंगा यानी कि गैलेक्सी है। इस गैलेक्सी का नाम है एंड्रोमेडा गैलेक्सी और यह हमारी धरती से 2500000 लाइट ईयर्स की दूरी पर है। और इस एंड्रोमेडा गैलेक्सी में हमारी मिलकीवे गैलेक्सी के मुकाबले दुगने सितारे हैं और यह एंड्रोमेडा गैलेक्सी तकरीबन 300 किलो मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से हमारी तरफ बढ़ रहा है। जो की गोली की रफ़्तार से 10 गुना ज्यादा है। अभी आसमान कुछ ऐसा दिखता है और तकरीबन 200 करोड़ साल में एंड्रोमेडा हमारे इतने करीब आ जाएगा कि जब लोग सर उठाकर आसमान की तरफ देखेंगे तो उनको यह दिखेगा और तकरीबन 375 करोड साल बाद हमारा आसमान कुछ इस तरीके का दिखेगा। भले ही यह सांइस फिक्शन या वी एफ एक्स या फिर हमारी कंप्यूटर और लैपटॉप की स्क्रीन में लगे वॉलपेपर की तरह नजर आ रहा है। लेकिन यह 375 करोड़ साल में हकीकत होगा और तकरीबन 400 करोड़ सालों में आसमान कुछ इस तरीके से नजर आएगा जो कि बेहद खूबसूरत भी है और काफी ज्यादा डरावना भी क्योंकि तब एंड्रोमेडा गैलेक्सी हमारी मिलकाईवे गैलेक्सी से टकराव कर चुकी होगी। पूरा का पूरा आसमान अलग अलग रंगों से चमकेगा क्योंकि तब नए सितारों का जन्म हो रहा होगा। चारों तरफ आसमान का मिजाज कुछ और ही होगा क्योंकि एंड्रोमेडा गैलेक्सी और हमारी मिलकाईवे गैलेक्सी आपस में टकरा कर के एक नई गैलेक्सी का निर्माण करेगी।अभी ये जो आपकी स्क्रीन में चल रहा है।वह दिखा रहा है कि आखिर एंड्रोमेडा गैलेक्सी और हमारी मिलकाईवे गैलेक्सी आपस में टकरआयेगी तो कैसा दिखेगा। लेकिन आप अपने जहन में या अपने दिमाग में ये बात जरूर रखें कि आप हर सेकंड में करोड़ों सालों को पार होते हुए देख रहे हैं यकीनन ये गलैक्सीज बेहद बड़ी है क्या यह गहरी बेहद बड़ी है और भविष्य में कभी ना कभी आपस में टकराएगी ही और कहीं आपके जहन में ये सवाल तो आएगा की क्या उस टकराव में हमरी पृत्थवी बचेगी या हमारा सूरज बच पाएगा तो जवाब है बेशक बचेगा क्योंकि दोनों गैलेक्सी बहुत बड़ी है। बेहिसाब बड़ी हैं तो इनके बीच में स्पेस बहुत ज्यादा है तो हो सकता है और होने की गुंजाइश है कि हम हमरा सोलार सिस्टम बिना चुए ही निकल जाए। अगर अगर एक इंसान के पूरे जीवन काल की बात की जाए तो कोई इंसान अगर 100 साल तक भी आसमान की ओर देखता रहेगा तो उसे आसमान में कोई भी बदलाव नजर नहीं आएगा और वह भी इसलिए क्योंकि इसे पूरा होने में करोड़ों साल लगेगा। और फिर आने वाले करोड़ों सालों में ये दोनों गालैक्सीज मिलकर एक नई गैलक्सी को जन्म देगी। हमारी धरती एक नई गैलक्सी का हिस्सा होगी और शायद उस नए और बेहद विशाल गैलक्सी का नाम होगा मिल्कड्रॉमेडा
और उस वक़्त उस गैलक्सी में रहना और बेहद खूबसूरत आसमान को और बनते हुए नए नए सितारों को अपनी आंखों से देखना काफी खुशकिस्मती की बात होगी। लेकिन फिर भी उस वक्त जो इंसानों की पीढ़ी उस गैलेक्सी धरती के अंदर रह रही होगी वह काफी सारी चीज़ों को मिस करेगी। भले आसमान का नजर कितना भी ज्यादा खूबसूरत क्यों ना हो।
















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